



हमने आपके द्वार पर दस्तक दी है, आवाज़ दी है... आपको साथ-साथ चलने का आह्वान किया है। जागिए, जागरण जीवन-मंत्र है। हम सबका कल्याण एक साथ... एक जुट होकर... आवाज़ बुलंद करने में है। कंधे से कंधा मिलाकर चलने में है।

जिस कुल में नारियों कि पूजा, अर्थात सत्कार होता है, उस कुल में दिव्यगुण, दिव्य भोग और उत्तम संतान होते हैं और जिस कुल में स्त्रियों कि पूजा नहीं होती, वहां जानो उनकी सथ क्रिया निष्फल हैं।

हम बच्चे हिंदुस्तान के। बच्चे हम संसार के।। कल कल बहती नदियाँ हों,. जल में पलता जीवन हो। और तटों पर कलरव करता,. विहग मनभावन हो। धरती पर पौधे रोपें हम,. अपनी मधु मुस्कान के। हम बच्चे हिंदुस्तान के।
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Maa Bharti Vaahinee
🕉️आप्त वचन
धृति क्षमा दमोsस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रह:।
धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।।
धर्मो रक्षित रक्षितः
हम आर्य पुत्र अपनी सनातन परम्परा पर अविचल_अडिग_अपरिवर्तनीय रहते हुए वैश्विक सौहार्द की कामना का अनुसरण करने के कारण अजात शत्रु थे ..अजात शत्रु हैं..अजात शत्रु रहेंगें!
"विश्व गुरु" के रूप में हमारी पहचान "शांति दूत" की अवधारणा के कारण है!
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः!
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्'!!
हमारी रगों में सृष्टि के उद्भव से निरंतर प्रवाहित है!
प्राणियों में सद्भावना हो..विश्व का कल्याण हो..धर्म की विजय हो..अधर्म का नाश हो..हमारा शाश्वत उद्घोष है!
"माॅ भारती वाहिनी" का जन्म इन्हीं शाश्वत मूल्यों को पुनर्स्थापित करने के लिए हुआ है!
हमारा विकल्प विहिन संकल्प है कि "माॅ भारती वाहिनी" समग्र राष्ट्र से प्रचंड पुरूषार्थी नागरिकों की एक "वाहिनी" गठित करेगी जो व्यक्ति से परिवार..परिवार से समाज..समाज से राष्ट्र..तक भारतीय शाश्वत मूल्यों _ नैतिक धार्मिक मानदण्डों _ वैश्विक सौहार्द संस्कारित करेगी!
निःसंदेह भारत "विश्व गुरु" के अपने स्थान को पुनः प्राप्त करने में सक्षम होगा!
माॅ भारती वाहिनी"का संकल्प संपूर्ण भारतवंशियों की एकजुटता_ सामूहिक उर्जा_लक्ष्य के प्रति समर्पण की शक्ति पर ही साकार होना सम्भव है!
"विश्व बंधुत्व" का "विश्व पटल" पर शंखनाद करने वाले सिर्फ और सिर्फ हम भारतीय हैं..ऐसा पूरा विश्व प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करता है!
हम अदम्य नारी शक्ति और प्रचंड पुरूषार्थी युवको के संगठित बल पर अपना संकल्प साकार कर सकते हैं!
Goals Of Maa Bharti Vaahinee
स्वयं का निर्माण
शाश्वत संकल्प के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम वाहिनी के प्रत्येक कर्मयोगी को स्वयं को भारतीय मूल्यों_मान्यताओं_नैतिक मानकों के अनुरूप संस्कारित करना होगा!वरना किसी को संस्कारित करने का दावा खोखला होगा!
कर्मयोगी को उत्तरदायी होने की समझ
तटस्थ भाव भयानक परिणाम का कारण बनता है...क्षमा का कोई स्थान उनके लिए नहीं है..जो परिवार ..राष्ट्र की समस्याओ के प्रति या तो स्वयं को उत्तरदायी नहीं समझते..उदासीन है..या तटस्थ हैं! याद रखिये इतिहास उन्हें कभी क्षमा नहीं करता.. जो तटस्थ हैं..हमारा सनातन विश्वास है कि.. उत्पीड़न करने वाले से उत्पीड़न सहन करने वाला..या दर्शक बने रहने वाला अधिक दोषी है!
स्वयं की आवाज को राष्ट्र की एकता _अखंडता_अस्मिता एवं संप्रभुता से जोड़ना
आजादी के 77 वर्षो बाद भी.. हम भारत के जनगण राष्ट्र के लिए केवल चुनावों मे मतदान करके अपने दायित्व की पूर्ति समझते हैं..कितना दुर्भाग्य है ..इस अहम दायित्व में भी 40% की भागीदारी नहीं होती! ऐसे लोंगो को चिंतन करना होगा..क्या उन्हें भारत का नागरिक होने का अधिकार है? जबकि भारत का भविष्य कुछ चंद नेता_ नौकरशाह एवं बड़े उद्योग घराने तय करने लगे हैं! हमारे गूंगे बहरे बने रहने का एक परिणाम 1947 का बंटवारा था! हमारी गूंगे और बहरे बने रहने के कारण .. हमारे भारत भूमि के तीन टुकड़े हुए एवं मानवता शर्मसार हुई! आगे ऐसे किसी घृणित घटनाक्रम की पुनरावृति न हो इसके लिए हम सभी भारतवंशियों के पुरूषार्थ के भरोसे "माॅ भारती वाहिनी" राष्ट्र की एकता अखंडता एवं संप्रभुता के लिए आवाज बनकर उभरेगी ऐसा हमारा एकीकृत संकल्प है!
नारी शक्ति का समन्वय
हमारा देश नारी/शक्ति प्रधान देश है.. स्त्रियां धर्म धूरी हैं.. पुरुषों के पुरुषार्थ की जननी होती है नारी..जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण महाराणा प्रताप की माताश्री जयवंता बाई और छत्रपति शिवा जी की माताश्री जीजाबाई हैं!ऐसे अनगिनत नारी शक्तियों से हमारा इतिहास गौरवान्वित है! "माॅ भारती वाहिनी" हर घर की शक्ति स्वरूपा माता बहनों को जोड़कर.. उनके शक्ति के दम पर भारत को आध्यात्मिक सामरिक वैश्विक परम वैभव शाली बनाने में आस्था और विश्वास रखती है!
फूट डालो और राज करो
यह हमरे समाज की भयानक त्रासदी है..हमने सदियों से इस त्रासदी के दुष्परिणाम भोगे हैं ..यह स्वीकार करने में हमें शर्म आनी चाहिए कि आज भी हमारा समाज इस त्रासदी पूर्ण सोच से उबर नहीं पाया है!"माॅ भरती वहिनी" इस निंदनीय और त्रासद पूर्ण मान्यता से भारतीय जनगण को मुक्त करने के प्रति संकल्पित है!
आह्वान...
"माॅ भारती वाहिनी" का परिचय भारतवंशियों के पुरुषार्थ एवं धर्म के प्रति निष्ठा से है! अतः विकल्प विहिन संकल्प को चरितार्थ करने के लिए हम और आप "माॅ भारती वाहिनी" नामक इस पौधे को अपनी अपनी ऊर्जा देकर एक विशाल वट वृक्ष बनाएं जो राष्ट्र में अमन चैन_ शांति का शंखनाद करते हुए... "विश्व पटल" पर "विश्व बंधुत्व " का भाव स्थापित करने में सफल हो!
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